Hello dosto mera name shakil Ahmad hai aur mera maksad islam ke taur tarika batana aur sikhana hai

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2018

नमाज़ पढ़ने का तरीका

हेल्लो दोस्तों
                 आज मै नमाज़ पढ़ने के बारे में बताऊंगा आजकल के माहौल में लोगो को नमाज़ पढ़ना एक बोझ लगता है ऐसी में कोई पढ़ना चाहता तो उसे नमाज़ पढ़ने का तरीका मालूम नहीं और किसी को सुरह याद नहीं आज मै इसी के बारे में बताऊंगा की नमाज़ में नियत कैसे करे,सना कैसे पढ़े,कयाम कैसे करे,रुकू कैसे करे,सिज्दा कैसे करे,तहीयत कैसे पढ़े,दरूद कैसे पढ़े वगैर तो चलिए शुरू करते है



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↙              सबसे पहले नमाज़ पढ़ने का तरीका ये है के बे वज़ू यानि वज़ू करके क़िबला रुख दोनों पाओ के पंजो में चार उंगुली का फासला करके खड़ा हो और दोनों हाथ कान तक ले जाए के उन्गुठे कान की लो से छू जाए इस हाल में के हथेलिया क़िबला रुख हो फिर नियत करके अल्लाह्हुँक्बर कहता हुआ हाथ निचे लाकर नाफ़ के निचे बांध ले और और सना पढ़े

سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعالَى جَدُّكَ وَلا إِلَهَ غَيْرُكَ

 :ترجمہ

Ae Allah teri zaat khatao'on se paak hai khoobiyan wali hai,aur tera naam barkat wala hai,aur teri shaan oonchi hai aur tere siwa koi ibadat ke qaabil nahi


TA'AWWUZ (تعوذ)



أَعُوْذُ بِا للّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيْمِ



:ترجمہ

Panaah maangta hoon main Allah ki shaitan mardood se.



TASMIYAH (تسمیہ)


بِسۡمِ اللهِ الرَّحۡمٰنِ الرَّحِيۡمِ 

Shuru Allah ka naam le kar jo bara meherbaan aur nihayat reham karne wala hai.
 पढ़कर अल्हदो पढ़े अल्हदो ख़तम होने आमीन आहिस्ता कहे इस के बाद कोई सुरह के सात या तिन आएते पढ़े या एक आयते जो के छोटी तिन आयते के बराबर हो-अब अल्लाह हुअक्बर कहता हुआ रुकू में जाए और घुटनों को हाथ से पकर ले उस तरह के हतेलिया घुटने पर हो, उंगुलिया खूब फैली हो, पीठ बिछी हो और सर पीठ के बराबर हो ऊँचा निचा न हो और कम से कम तिन बार سُبْحَانَ رَبِّیَ الْعَظِیْمْ कहे फिर سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ कहता हुआ सीधा खरा हो जाए और अकेले नमाज़ पढ़ता हो तो इस के बार رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُकहे फिर अल्लाह हुअक्बर कहता हुआ सिज्दा में जाए उस तरह के पहले घुटने जमीन पर रखे फिर हाथ फिर दोनों हाथो के बिच में नाक फिर पेसानी रखे उस तरह के पेसानी और नाक की हड्डी जमीन पर जमाए और बाजु को गर्दनो और पीठ को रानो और रानो को पिदिलियो से जुदा रखे और दोनों पाओ के सब उंगुलिया के पीठ क़िबला रुख जमे हो- और हथेलिया बिछी हो और उंगुलिया क़िबला की रुख हो और कम से कम तिन बार سُبْحَانَ رَبِّیَ الْاَعْلیٰ कहे फिर सर उठाये फिर हाथ, और दाहिना क़दम खड़ा करके उसकी उंगुलिया किबला रुख करे और बाया क़दम बिछा कर उस पर खूब सीधा बैठ जाये और हतेलिया बिछा कर रानो पर घुटनों के पास रखे फिर अल्लाह अकबर कहता हुआ सजदा में जाये और पहले की तरह सजदा करके फिर सर उठाये फिर हाथ को घुटनों पर रख कर पंजो के बल खड़ा हो जाये अब सिर्फ  بِسْمِ اللهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ पढ़कर करायत शुरू करे फिर पहले की तरह रुकू सजदा करके बाया कदम बिछा कर बैठ जाये और तह्हियात पढ़े 

التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ

وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلاَمُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ،

أَشْهَدُ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ*‏‏

तह्हियात पढ़ते हुए जब कलमा ला के करीब पहुंचे तो दाहिने हाथ की बिच की उंगुलिया और अंगूठे का हल्का बनाये और उसके पास वाली को हतेली से मिला दे और लफ्ज़ ला पर कलमा की उंगुली उठाये मगर उस को हिलाए नहीं और कलम इला पर गिरा दे और सब उंगुलिया तुरंत सीधी करले अब अगर दो से ज्यादा रकात पढनी है तो उठ खड़ा हो और उसी तरह पढ़े मगर फ़र्ज़ नमाज़ों की उन रकातो में अलहम्दो के साथ सूरत मिलाना जरुरी नहीं यानि अगर आप फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ रहे है तो अलहम्दो के सुरह न पढ़े अब पिछला कायदा जिस के बाद नमाज़ ख़तम करेगा उसमे तह्हियात के ये दरूद शरीफ पढ़े.

DUROOD E IBRAHEEMI (درودِابراھیمی)


اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ، وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ

وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ



اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ، وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ،وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ،
*إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ

 :ترجمہ


Ae Allah Rehmat naazil farmaa Muhammad (S.A.W.) par aur Aap ki AAL (aulaad) par jaisa k Rehmat naazil farmaee tu ne Ibrahim (A.S) aur Ibraheem (A.S) ki AAL par beshak tu bohat tareef ke qaabil aur bari buzurgi wala hai.Ae Allah Barkat naazil farmaa Muhammad (S.A.W.) par aur Aap ki AAL par jaisa k Barkat naazil farmaee tu ne Ibraheem (A.S) par aur Ibraheem (A.S) ki AAL par beshak tu bohat tareef  ke qaabil aur bari buzurgi wala hai.

फिर उसके बाद ये दुआ पढ़े.


Allahumma inni zalamtu nafse zulman kaseeraw walayagfiruz zunuba illah anta fagfirli Magfiratam minindika warahamni innaka antal gafurur Rahim

या कोई दूसरी दुआ मसुरह पढ़े उसके बाद दाहिने मूंदे की तरफ मुंह करके السَّلامُ عَلَيْكُم ورَحْمَةُ اللهِ कहे फिर बाये तरफ السَّلامُ عَلَيْكُم ورَحْمَةُ اللهِ कहे अब नमाज़ पूरी हो गयी 
सलाम फेर कर इमाम दाए या बाए तरफ मुंह कर ले इस लिए के सलाम के बाद मोक्तादियो की तरफ पीठ करके बैठना मकरूह है.
उसके बाद दुआ के लिए हाथ उठाये और ये दुआ पढ़े.

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किस उम्र में बच्चा को नमाज़ सिखाई जाए

बच्चा जब 7 साल का हो जाए तो उसे नमाज़ पढ़ने का तरीका बताया जाए और जब दस साल का हो जाए नमाज़ पढ़ाया जाए और ना पढ़े तो मार कर पढ़वाए जाए-और इसके कबल हम नमाज़ का तरीका बताए इन 6 बातो को बताते है जिन के बगैर नमाज़ शुरू नहीं हो सकती इन 6 बातो को सर्त नमाज़ कहते है.

                        सर्त नमाज़ 6 किस्म के होते है 

1.तहारत 
2.सत्र औरत 
3.वक्त 
4. इस्तकबाल किबला 
5.नियत 
6.तकबीर तहरिमा 

                         पहली सर्त यानि तहारत 

इसका मतलब ये है के नमाज़ी के बदन कपड़े और नमाज़ की जगह पर कोई नजासत जैसे पेसाब-पैखाना- खून- शराब-गोबर- लीड वगैरा ना लगी हो और नमाज़ी बे वजू और बे गुसल भी ना रहे 

                          दूसरी सर्त यानि सत्र औरत 

सत्र औरत यानि मर्द का बदन नाफ से लेकर घुटनों तक ढका हो -घुटने खुला ना रहे- और औरत का तमाम बदन ढका हो सिवाए मुंह और हथेली के और तख्नु तक पैर के और टखने भी ढके  रहे.

                                 तीसरी सर्त यानि वक्त 

यानि जिस नमाज़ के लिए जो वक्त मोकरर है वह नमाज़ उसी वक्त पढ़ी जाए जैसे फज़र की नमाज़ सुबह सादिक से लेकर सूरज निकलने से पहले तक पढ़ी जाए और जोहर की सूरज ढलने के बाद से हर चीज़ के साया के दोगुने होने तक इसके अलावा असली साया के और असर की साया के दोगुना होने के बाद से सूरज डूबने तक और मगरिब की सूरज डूबने के बाद से सुफेदी गाएब होने तक और इसा की सुफेदी गाएब होने के बाद से सुबह सादिक शुरू होने से पहले तक.

               चौथी सर्त यानि इस्तकबाल किबला 

यानि काबा शरीफ की तरफ मुंह करना 

                  पांचवी सर्त यानि नियत करना 

यानि जिस वक्त की जो नमाज़ फ़र्ज़ या वाजिब या सुन्नत या नफिल या कज़ा पढ़ना हो दिल में उसका पक्का इरादा करना के ये नमाज़ पढ़ रहा हूँ.

                     छठी सर्त यानि तकबीर तहरिमा 

तकबीर तहरिमा यानि अल्लाह हुअक्बर कहना- ये आखरी सर्त है के इसके कहते ही नमाज़ शुरू हो जाएगी - पहली पांच सरतो का तकबीर तहरिमा से पहले और ख़तम नमाज़ तक मुजुद रहना जरुरी है.

फ़र्ज़ व वाजिब और सुन्नत मुस्तहब का हुक्म 

इस तरीका में बाज़ चीज़े फ़र्ज़ है किसके बगैर नमाज़ होगी ही नहीं- बाज़ वाजिब है के इसको छोड़ना गुनाह और नमाज़ का फिर से पढ़ना वाजिब है और भूल कर छूटने से सिजदा सहु वाजिब है और बाज़ सुन्नत मोकिदा है के जिस कोछोदने की आदत गुनाह है और बाज़ मुस्तहब है के जिसका करना सवाब और ना करना गुनाह नहीं.

नमाज़ के वाजिबात का बयान 

तकबीर तहरिमा में लफ्ज़ अल्लाह हुअक्बर कहना पूरी अलहम्दो लिल्लाहे पढ़ना-सूरत या आयत मिलाना- फज्र नमाज़ में दो पहली रकअतो में करायत वाजिब है - अलहम्दो और उसके साथ सूरत या आयत मिलाना फ़र्ज़ की दो पहली रकअतो में और नफिल और वित्र और सुन्नत की हर रकअत में सूरत या आयत से पहले एक ही बार अलहम्दो पढ़ना- अलहम्दो और सुरटके दरमियान आमीन और बिस्मिल्लाह के सिवा कुछ और ना पढ़ना- करायत ख़तम करके फ़ौरन रुकू करना- एक सिजदा के बाद दूसरा सिज्दा होना के दोनों सिज्दो के बिच कोई रकन ना आए पाए- तआदिल अरकान यानि रुकू- सजूद- कुमा- जल्सा में कम से कम एक बार सुबहान अल्लाह के बराबर ठहरना-कौमा यानि रुकू से सीधा खड़ा हो जाना- सिजदा में हर पाओ की तिन तिन की उंगुलिया के पीठ जमीन पर लगना- जल्सा यानि दो सिजदा के दरमियान सीधा बैठना अगर चा नफिल नमाज़ हो- फ़र्ज़ और वित्र और सनन रवातब में कायदा औला में तस्हिद पर कुछ ना पढना.

तो दोस्तों ये पोस्ट आपको कैसा लगा अच्छा लगा तो कमेंट और शेयर भी करे अस्सलामेलेकुम 
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