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शुक्रवार, 13 अप्रैल 2018

chand dekhne ka bayan- चाँद देखने के बारे में कुछ बाते

हेल्लो दोस्तों
              आज मै आपको चाँद देखने के बारे में बताऊंगा और चाँद देखना क्यों जरुरी है और किस महीने का चाँद देखना वाजिब है और मुतालिह साफ़ न होने की सूरत में चाँद का सबूत, आदिल की तारीफ़,मस्तुर की तारीफ़,मुतालिह साफ़ होने की सूरत में चाँद का सबूत और चाँद का गवाही इन सब बातो के बारे में इस पोस्ट में बताऊंगा तो चलिए शुरू करते है

chand dekhne ka bayan- चाँद देखने के बारे में कुछ बाते

चाँद देखने का बयान

रसूल अल्लाह सल्लाहे अलेहे व् सलाम ने फ़रमाया चाँद देखकर रोज़ा रखना शुरू करो और चाँद देखकर इफ्तार(ईद) करो  और अगर अब्र हो तो सबान की गिनती 30पुरे कर लो और फ़रमाया रोज़ा न रखो जब तक के तुम चाँद न देख लो और इफ्तार(ईद) न करो जब तक चाँद न देख लो और अगर आब्रो हो तो मुक्दार पूरी कर लो (यानि 30 दिन).

किस महीने का चाँद देखना वाजिब है

मसला- इस तारीख महीनो का चाँद देखना वाजिब है जैसे- सबान ,रमजान ,सवाल ,जिल्हिज्ज़ा ,जिल्कायदा मसला-  सबान की 29 साम के वकत चाँद देखे औरचाँद दिखाई दे तो कुल रोज़ा रखे वर्ना सब्बान के 30 दिन पुरे करके रमजान का महिना शुरू करे

मोतालिह साफ़ न होने की सूरत में चाँद का सबूत 

मसला- मोतालिह साफ़ न होने की सूरत में यानि आसमान साफ़ न होने की सूरत में सिर्फ रमजान का सबूत एक मुसलमान आकिल बालिग मस्तोरआदिल की गवाही से हो जाता हैयानि रमजान की गवाही कोई एक मुसलमान जो बालिग़ हो चाहे मर्द हो या औरत और रमजान के सेवा बाकि तमाम महीनो के चाँद के लिए दो मर्द या एक मर्द और दो औरते गवाही दे और सब आदिल हो और ये लफ्ज़ कहे के गवाही देता हूँ के मैंने खुद चाँद देखा तब चाँद का सबूत होगा .

आदिल की तारीफ़ 

आदिल होने की ये माना है के कबीरा गुनाहों से बचता हो और ऐसा काम न करता हो जो मरौयत के खिलाफ हो जैसे बाजार में खाना.

मस्तोर की तारीफ़ 

मस्तोर का माना ये है के जिसका जाहिरी हाल शुरू के मोताबिक है मगर बातिन का हाल मालूम नहीं

मसला- जिस आदिल सख्स ने रमजान का चाँद देखा उस पर वाजिब है के उसी रात में सहादत अदा करे मसला- गाँव में चाँद देखा और वहा कोई काजी व् हाकिम व् मोर्वी नहीं जिस के पास गवाही दे तो गाँव वालो को जमा करके सहादत अदा करे और अगर ये आदिल है तो लोगो पर रोज़ा रखना लाजिम है .

मोतालिह साफ़ होने की सूरत में चाँद का सबूत 

मसला- अगर आसमान साफ़ हो तो जब तक के सहादत न दे तो चाँद का सबूत नहीं हो सकता (चाहे चाहे रमजान का हो या ईद का या और कोई किसी महीने का) रहा ये के इसके लिए कितने लोग होने चाहिए तो ये काजी के राय पर है जितने गवाही से उसे ग़ालिब गुमान हो जाये उतने की सहादत से चाँद होने का हुक्म दे देगा लेकिन अगर शहर के बाहर से या किसी ऊँची जगह से चाँद देखना बयान करे तो एक मस्तोर का भी बात सिर्फ रमजान के चाँद में मान लिया जायेगा मै ये कहता हूँ के  चाँद देखने में लोगो की जो सुस्ती व् लापरवाही का हाल है उसके एतबार से तो असमान साफ़ होने की हालत में ईद के सिवा और चाँद में भी बजाए बहुत आदमियों के दो गवाही की गवाही काफी होनी चाहिए.

चाँद की गवाही 

सहादत देने में ये कहना जरुरी है के मै गवाही देता हूँ बगैर इस लफ्ज़ के सहादत नहीं मगर अब्र में रमजान के चाँद की गवाही में इतना भी काफी है के मैंने अपनी आँख से उस रमजान का चाँद आज या कल या फला दिन देखा है

मसला- अगर कुछ लोग अगर ये कहे के फला जगह चाँद हुआ बलके अगर ये सहादत भी दे के फला जगह चाँद हुआ बलके अगर ये सहादत दे के फला फला सख्स ने देखा बलके अगर ये सहादत दे के फला जगह के काजी ने रोज़ा या इफ्तार के लिए लोगो से कहा तो ये सब तरीके नहीं काफी है

मसला- तनहा इमाम या काजी ने ईद का चाँद देखा तो उन्हें ईद करना या ईद का हुक्म देना जाईज नहीं

  मसला- किसी शहर में चाँद हुआ और वहा से मोतायिद व् जमाअते दुसरे सहर में आई और सब ने खबर दी के वहा फला दिन चाँद हुआ है और तमाम शहर में ये बात मसहुर है और वह के लोगो ने रवायत के बिना पर फला दिन से रोज़े शुरू किये तो यहाँ वालो के लिए भी सबूत हो गया

मसला- किसीने तनहा रमजान का या ईद का चाँद देखा और गवाही दे मगर काजी ने उस की गवाही कबूल न की तो उस पर रोज़ा रखना वाजिब है अगर न रखा या तोड़ डाला तो कज़ा लाजिम है

मसला- अगर दिन में चाँद दिखाई दिया दोपहर से पहले या दोपहर के बाद बहरहाल वह आने वाली रात का माना जायेगा यानि अब जो रात आएगी इससे महिना शुरू होगा अगर 30 रमजान के दिन में देखा तो ये दिन रमजान ही है सवाल का नहीं और रोज़ा पूरा करना फ़र्ज़ है और अगर सबान की 30 तारीख के दिन में देखा तो ये दिन सबान का दिन है रमजान का नहीं लिहाजा आज का रोज़ा फ़र्ज़ नहीं

मसला- एक जगह चाँद हुआ तो वह सिर्फ वाही के लिए नहीं बलके तमाम दुनिया के लिए है मगर दूसरी जगह के लिए उसका हुक्म उस वकत है के दूसरी जगह वालो पर उस दिन तारीख में चाँद होना सरई सबूत से साबित हो जाये यानि चाँद देखने की गवाही गुजरे या काजी के हुक्म की गवाही गुज़रे वहा से अगर खबर दे के फला जगह चाँद हुआ है और वहा लोगो ने रोज़ा रखा

मसला- तार - टेलीफ़ोन - रेडिओ से चाँद देखना साबित नहीं हो सकता उस लिए के अगर उन्हें हर तरह सही मान भी लिया जाये जब भी ये एक खबर है सहादत नहीं और एक खबर से चाँद का सबूत नहीं होता

मसला- चाँद देखकर उसकी तरफ उंगुली से इशारा करना मकरूह है

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